नेता नगरी के भंवर में फंसती सुभाष बाबू की विरासत
स्कूल के दिनों में जब भी हमारे आदर्शों के बारे में अध्यापक पूछते, तो नेता जी सुभाषचंद्र बोस का नाम अवश्य ही जेहन में आ जाता था। और आना लाजिमी भी है, क्योंकि सुभाषचंद्र बोस भारत के महान स्वतंत्रता सेनानी थे। हम सभी विचारधाराओं से दूर स्वतंत्रता सेनानियों के बारे में बड़े गौर से पढ़ते। तब हम नहीं जानते थे कि कुछ ऐसी भी विचारधारा होती होगी जो महापुरुषों को भी बाँट लेती है। जब विचारधारा का ज्ञान आया तो देखा कि से सरदार पटेल, भगत सिंह, जवाहरलाल नेहरू और अंबेडकर आदि सभी की तरह ही नेता जी सुभाष चंद्र बोस भी नेताओं और उनकी नेता गिरी के देर में फंसे चुके हैं। वामपंथ, दक्षिणपंथ और दूसरी सभी विचारधाराओं के लोग उन्हें अपनी सहूलियत और वोट बैंक के हिसाब से अपने-अपने पाले में खींचने की कोशिश में लगे रहते हैं। किसी ने उनके त्याग, देशभक्ति और शिक्षाओं को पढ़ने या समझने की कोशिश भी नहीं की। जिसमें नेताओं के साथ साथ आम लोगों की भी अच्छी-खासी तादाद है।
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